आयुर्वेदिक ज्ञान? 5 आम मिथक

आयुर्वेदिक ज्ञान? 5 आम मिथक

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5000 से अधिक वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा भारत की सबसे प्राचीन एवं प्रभावकारी चिकित्सा है। इसके लाभों के प्रचुर प्रमाण होने के बावजूद, यह कुछ गलत धारणाओं से ग्रस्त है जो कि सर्वथा भ्रम उत्पन्न करती है।

इसलिए हम आयुर्वेद के बारे में कुछ आम गलतफहमियों को उजागर करना चाहते है जो कि लोगों को यह समझने में मदद करेंगी कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति की तरह, आयुर्वेद में भी विज्ञान का समर्थन है। यहां उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

आयुर्वेदिक उपचार धीमी गति से काम करता हैं

आयुर्वेदिक उपचार प्रमुखता से रोग के लक्षणों का उपचार नहीं करता,बल्कि रोग को ही निर्मूल करता है।
इसके बारे में कहा जाता है कि आयुर्वेद में दर्द का नहीं मर्ज का इलाज होता है अर्थात जब मर्ज नहीं रहेगा तब स्वभाविक रूप से दर्द भी समाप्त हो ही जाएगा। चूँकि मर्ज की पैठ गहरी होती है इसलिए थोडा समय लगना स्वभाविक है। हालांकि, आयुर्वेद में कई उपचार भी हैं जो कुछ तेज अनुभव जैसे जुलाब त्वरित परिणाम (आधुनिक चिकित्सा की तरह!) पैदा करते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप सही समय एवं विधिपूर्वक उपचार प्राप्त करते हैं तो आयुर्वेदिक उपचार जल्दी परिणाम प्रदान करते हैं। इसलिए अपनी स्थिति को बदतर या जीर्ण होने की प्रतीक्षा न करें। एक आयुर्वेद विशेषज्ञ के पास उस समय पर पहुँचें जब आप अस्वस्थता के शुरुआती लक्षणों का अनुभव करना शुरू करते हैं।

आयुर्वेद केवल मुट्ठी भर बीमारियों का इलाज कर सकता है

आम धारणा के विपरीत मधुमेह और गठिया जैसी सामान्य स्थितियों से लेकर अधिक पुरानी स्थितियों तक, आयुर्वेद विभिन्न प्रकार की बीमारियों का प्रभावी ढंग से उपचार कर सकता है। आधुनिक चिकित्सा की तरह आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी विशेषज्ञता के कई क्षेत्रों का विस्तार किया गया है, जिसमें कायचिकित्सा, कुमारभृत्य (बाल रोग और नवजात), शल्यतंत्र (सर्जरी), और भूत विद्या (मनोरोग) आदि।


आयुर्वेद विश्वास और आध्यात्मिकता पर आधारित है


जबकि भारत के प्राचीन शास्त्रों में आयुर्वेद को वेदों में निहित किया गया है। यह मुख्य रूप से शरीर विज्ञान, शरीर रचना विज्ञान और विकृति विज्ञान से संबंधित है और विकारों के इलाज और उपचार में मदद करने के लिए विस्तृत सूत्रीकरण भी प्रदान करता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा ने भी इसका लाभ उठाया है, और अभी भी आयुर्वेदिक ग्रंथों में विस्तृत अधिकांश व्यावहारिक अनुप्रयोगों से लाभ उठाया जा रहा है। इसके अलावा, आयुर्वेद में वर्णित जीवन के मूलभूत सिद्धांत समय के साथ परिवर्तनशील नहीं हैं अत: आयुर्वेद एक शाश्वत विज्ञान पर आधारित है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा में केवल जड़ी-बूटियाँ होती हैं

आयुर्वेदिक चिकित्सा में जड़ी बूटी के साथ अन्य उपयोगी औषधीय गुणयुक्त पदार्थो का भी उपयोग जैसे – सेंधा नमक, खनिज,भस्म, रेजिन, दूध, शहद, किण्वित पेय, चाय आदि का भी उपयोग किया जाता है। किसी व्यक्ति के आहार या जीवनशैली में बदलाव कर , व्यायाम दिनचर्या, योग और प्राणायाम को चिकित्सा में सम्मिलित कर विशेष प्रभावी उपचार दिया जा सकता है।

आयुर्वेद हानिरहित है

आयुर्वेद के बारे में एक आम धारणा है कि यह ‘हानिरहित’ है क्योंकि यह प्राकृतिक पदार्थो का उपयोग करता है, इसलिए यह हानिकारक नहीं हो सकता। जबकि ऐसा नहीं है, जानकारी ना होने के कारण नीम हकीमो द्वारा इस चिकित्सा में हानिकारक प्रभाव भी देखे गए है, अत: हमें सिर्फ सुशिक्षित चिकित्सक द्वारा प्रदान की गई चिकित्सा को ही अपनाना चाहिए अन्यथा कई प्रकार के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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